
देर तक आईने से वो कतराता होगा
ग़ज़ल बनाके मुझे जब गुनगुनाता होगा
एक तमन्ना है उस पल रूबरू हूँ मैं
मेरा ख्याल लिए जब वो मुस्कुराता होगा
खोई आँखों चाँद निहारते हुए शायद
मेरे अक्स को ही पास बुलाता होगा
नाम हिना से लिख के हथेली पे अपनी
कैसे सहेलियों से भी वो छुपाता होगा
छुपा के तस्वीर तकिये में रखी होगी मेरी
बहाने से सीने पे मेरे सर वो टिकाता होगा
बहुत खुमारी की एक रात गुजरी थी कभी
उसी शब् की महक से लम्हा बिताता होगा