
वो दीवारों की पुरानी तस्वीरें हटा रहा था
कभी जिसके मै रेत के घरोंदे बचा रहा था
जिसकी पदचाप ने दिए नए आयाम जिन्दगी को
वही मेरी जिन्दगी को बेमानी बता रहा था
जागती थी आंख उसकी करवातो के साथ
वो अब नजरो के हर परदे हटा रहा था
दुनिया सिमट गई थी जिस तस्वीर में मेरी
वो मेरा अक्स मुझे आइना दिखा रहा था
कोशिशे की मेरे सामने मुस्कुराने की बार बार
कतरा उसके कोरो का बस दर्द बता रहा था
जिस दामन में छुपके दुनिया से लड़ा वो
उसी आँचल को काँटों से महका रहा था
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