
कौन जाने हालाते हाल बदल ही जाए कभी
वो पास आए और बापस ही न जाए कभी
बहुत छोटी सी थी तमन्ना जो अब भी है
खुशी का moti आंगन में बरस जाए कभी
ख़बर न थी गुड़ियों का खेल जिन्दगी है मेरी
पर इसकी तरह मुझे कोई बदल ही लाये कभी
तरस रहा हूँ सदियों से शबनमी अहसासों को
प्यासी आंखे ही अब तो बरस ही जाए कभी
उसकी आमद से चटकी है कई कलियाँ देखो
वो मेरा आंगन भी तो महका ही जाए कभी
bahut hi sundar....
ReplyDeleteaccha likha hai.....
उसकी आमद से चटकी है कई कलियाँ देखो
ReplyDeleteवो मेरा आंगन भी तो महका ही जाए कभी
आप बस लिखती रहिये
शब्दों में रवानी है जो हमें लुभाती रहती है.
bhut khoob !
ReplyDeleteबेहद खूबसूरत रचना
ReplyDeleteबहुत ही सुन्दर भाव है..और उतनी ही गहराई भी
आपको बधाई
मेरी शुभकामनायें
आज की आवाज
बहुत सुन्दर और आशावादी रचना
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